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Abstract

भारतीय परम्परा में योग अति प्राचीन है भारतीय संस्कृति के प्रारम्भ से योग किया जाता रहा है। योग दर्शन सांख्य दर्शन द्वारा अनुमोदित ज्ञान प्राप्ति के तीनों साधन (प्रत्यक्ष, अनुमान, शब्द) मान्य है। परन्तु चैथे सोपान के रूप में अष्टांग योग को लिया जाना है यह वह साधन है जिससे सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। योग दर्शन का प्रथम सूत्र ‘‘अथ अनुशासन’’ से लिया है। व्यक्ति को शरीर वातावरण चित्त वृत्ति आत्मिक चेतना के लिए अनुशासन महत्वपूर्ण स्थान रखता है चित्तवृत्ति का निरोध ही अनुशासन है अनुशासन सेे चित्त पर नियंत्रण रखना ही अष्टांग योग का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।

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