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Abstract
संत निश्चल दास ने गद्य और पद्य में रचनाऐं की हैं। उनका ‘विचार सागर’ गद्यात्मक और पद्यात्मक दोनो हैं। वृति प्रभाकर उनका पूरा का पूरा गद्यात्मक है, और युक्तियाँ देकर भी उन्हें गद्यात्मक रुप से समझाने का प्रयास किया है। संत निश्चल दास गद्य की महता समझते थे इसलिए उन्होंने पद्य की अपेक्षा गद्य को अधिक अपनाया। विचार सागर में पद्य बहुत ही सूक्ष्म और सूत्र रुप में है। मंद बोध जिज्ञासाओं को, उन पद्यों की विस्तृत व्याख्या बिना, उनका पूरा तात्पर्य समझ में नहीं आ सकता था। वे ‘विचार सागर’ में इस बात की पुश्टि भी करते हैं-