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Abstract
1857 की क्रान्ति में पंजाब के व्यक्तियों का योगदान अहम् माना जाता हैं। उस समय पाकिस्तान का पंजाब, पंजाब तथा हरियाणा ही पूरा पंजाब था कुछ विद्वानों का यह कहना बहुत जल्दी हो जाता है कि 1857 में सारे पंजाब ने अंग्रेजों का साथ दिया लेकिन यहां पर हमें पंजाब के लोगों के दोनों पक्षो का बड़ी सावधनी पूर्वक अध्ययन करना चाहिए कि लोगों का किस तरह का व्यवहार था, तथा उनके व्यवहार तथा विद्रोह के बारे में केसी मानसिकता थी। देश गुलामी की बेड़ियो की नाजुक स्थिति से गुजर रहा था तो उस समय पंजाब को दोनों तरीकों से प्रस्तुत किया गया है विरोधी तथा सहयोगी।