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Abstract
गोदान प्रेमचन्द द्वारा रचित कृषक जीवन का महाकाव्य है। यह किसान के जीवन की समस्याओं, दुखों व त्रासदी को लेकर लिखा गया है। इस महाकाव्य की कथा में गांव और शहर के आपसी द्वन्द्व, भारतीय ग्रामीण जीवन के दुख, गांवों के बदलने, टूटने, बिखरने के यथार्थ और जमींदरी के जंजाल से आतंकित किसान की पीड़ा का मार्मिक चित्रण है।