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Abstract

संसार के किसी भी देश की शासन व्यवस्था या परिदृश्य को जानना है, तो वहाँ स्थापित न्याय व्यवस्था को सम-हजय लेना आवश्यक होता है। न्याय व्यवस्था ही वह प्रमुख स्तम्भ होता है, जिस पर सम्पूर्ण जनमानस का आधार स्तम्भ टिका हुआ है। न्याय का सम्बन्ध समाज से जुड़ी आस्था, विश्वास, मूल्यों एवं सांस्कृतिक ताने-ंउचयबाने से है। भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में तो न्यायपालिका की महता और अधिक गरिमापूर्ण माहौल में बनी रही है। यद्यपि न्यायिक व्यवस्था में आपसी वाद-ंउचयविवाद चलता रहा है, लेकिन फिर भी भारतीयों की अटूट श्रद्धा, विश्वास एवं जन भावनाएँ निरन्तर इसकी सफलता और उच्चाईयों की कहानी बयान करती है। भारत में न्यायपालिका तीसरा प्रमुख स्तम्भ माना जाता है। प्रारम्भ से ही भारतीय इतिहास में इसका अपना महत्व है। भारत ही दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जहाँ न्यायधीशों का चुनाव (नियुक्ति) स्वयं न्यायपालिका करती है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि हमारे मुल्क में न्यायपालिका का बहुत बड़ा महत्व है।

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